पाकिस्तान बनने के बाद पहली बार 1962 मे उठी थी अलग सिंधु देश की मांग…

पाकिस्तान में सिंधी राष्ट्रवाद के जीएम सैयद की 117 वीं जयंती पर आयोजित एक विशाल आजादी समर्थक रैली में प्रदर्शनकारियों ने अलग सिंधु देश की मांग के साथ आजादी के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य विश्व नेताओं के पोस्टर लहराए, और नरेंद्र मोदी जिंदाबाद के नारे भी लगाए। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के जमसोरो जिले में सैयद के गृहनगर में रविवार को आयोजित विशाल रैली के दौरान लोगों ने आजादी समर्थक नारे लगाए। अलग सिंधु देश की मांग करने वाले सिंध के राष्ट्रवादियों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सिंध की आज़ादी की उम्मीद की है। उन्होंने दावा किया कि सिंध, सिंधु घाटी सभ्यता और वैदिक धर्म का घर है जिसे ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था और उनके द्वारा 1947 में पाकिस्तान बनने के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों के हाथों में सौंप दिया गया था। उसके बाद से ही दर्दनाक हमलों के बीच सिंध ने अपने इतिहास, संस्कृति, स्वतंत्रता, सहिष्णु और सामंजस्यपूर्ण समाज के रूप में अपनी अलग ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखा है।

जेई सिंध मुत्तहिदा महाज के अध्यक्ष शफी मुहम्मद बुरफात ने कहा कि विदेशी और देशी लोगों की भाषाओं और विचारों ने न केवल एक-दूसरे को प्रभावित किया है, बल्कि मानव सभ्यता के सामान्य संदेश को स्वीकार और अवशोषित किया है उन्होंने आगे कहा, पूर्व और पश्चिम के धर्मों, दर्शन और सभ्यता के इस ऐतिहासिक मेल ने हमारी मातृभूमि सिंध को मानवता के इतिहास में एक अलग स्थान दिया है। बता दें कि पहली बार 1962 में पहली बार अलग सिंधु देश की मांग उठी थी।

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