अरविंद तिवारी

अयोध्या/ लगभग पाँच सौ वर्षों बाद अनेकों कुर्बानियों और संघर्षों और अदालत में मामला चलने के बाद आज अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्रीराम मंदिर की नींव रखी। भूमि पूजन के बाद पीएम मोदी ने कहा कि राम मंदिर हमारी संस्कृति का आधुनिक प्रतीक बनेगा। समूचा देश इस समय राम मंदिर निर्माण के लिए हो रहे ऐतिहासिक भूमि पूजन का साक्षी बना। विभिन्न माध्यमों से लोग इस ऐतिहासिक भूमिपूजन का लाईव प्रसारण देखकर बेहद खुश नजर आये। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होने पीतांबरी धोती और सुनहरा कुर्ता पहनकर दिल्ली से सबसे पहले लखनऊ पहुँचे और वहाँ दस मिनट रूककर हेलीकॉप्टर से अयोध्या के लिये रवाना हो गये। अयोध्या के साकेत कालेज मैदान पहुँचने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया।

तत्पश्चात वे अयोध्या पहुंँच हनुमानगढ़ी पहुँचकर वहाँ में पूजा किये। हनुमानगढ़ी में चाँदी का मुकुट पहनाकर मोदी का अभिवादन किया गया। जिसके बाद जन्मभूमि पहुँचकर मोदी ने रामलला के दर्शन कर साष्टांग दंडवत किया। यहाँ भूमिपूजन कार्यक्रम को पूरा करने के लिये काशी , अयोध्या , दिल्ली व प्रयागराज से 21 विद्वानों को बुलाया गया था। जिन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मोदी को भूमिपूजन संपन्न कराया। भूमिपूजन के दौरान मोहन भागवत, योगी आदित्यनाथ समेत अन्य कुछ मेहमान शामिल रहें। बेहद शुभ मुहूर्त में राम मंदिर का भूमिपूजन संपन्न हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम जन्मभूमि मंदिर की नींव में 09 शिलायें रखीं। यहाँ खास बात रही कि मंदिर की नींव खोदने के लिये चांँदी के फावड़े का इस्तेमाल किया गया जबकि नींव की ईंट पर सीमेंट लगाने के लिये चांँदी की कन्नी का भी प्रयोग किया गया। भूमिपूजन में शामिल सभी मेहमानों को लड्डू के साथ प्रसाद के रूप में चाँदी का सिक्का भेंट किया गया। मोदी ने यहाँ पारिजात वृक्ष भी लगाया। भूमिपूजन के लिए देश के दो हजार से ज्यादा प्रमुख तीर्थस्थलों, राष्ट्रीय महत्व के स्थानों और पवित्र नदियों से पवित्र मिट्टी और जल अयोध्या पहुँचा हुआ था। पूरी अयोध्या को 400 क्विंटल फूलों से सजाया गया था। थाईलैंड से ऑर्किड तो बेंगलुरु से अपराजिता के फूल मंगाये गये थे। वहीं, नारंगी और लाल रंग के डबल टोन्ड गेंदा के फूल कोलकाता से आये थे। भूमिपूजन स्थल और आसपास के मंदिरों को इनसे सजाया गया है। इसके अलावा, साकेत पीजी कॉलेज से नया घाट तक 50 से ज्यादा स्थानों पर रंगोली बनाने में फूलों का इस्तेमाल किया गया था।

आजादी के बाद मोदी इकलौते ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने इस पद पर रहते हुये रामलला के दर्शन किये। उनसे पहले इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी और खुद नरेंद्र मोदी बतौर प्रधानमंत्री अयोध्या पहुंँचे, लेकिन रामलला के दर्शन नहीं कर पाये थे। इस शिलान्यास कार्यक्रम में योगगुरु बाबा रामदेव, रामभद्राचार्य, जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज, मथुरा से मूलक-पीठ के राजेंद्र देवाचार्य, कांची मठ के गोविंद देवा गिरि महाराज, रेवसा डौंडिया के राघवाचार्य, चिदानंद मुनि, सुधीर दहिया अयोध्या पहुँचे हुये थे।

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