गाय, गोबर, गौमूत्र से जुड़ी योजना की आलोचना करने के लिए बीजेपी को ऐसे किसी भी अभियान से बचना चाहिए…

रायपुर/ छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने गौधन न्याय योजना के तहत गाय का गोबर 2 रुपए प्रति किलो में खरीदने की शुरुआत कर चुकी है, तथा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के पहले त्यौहार माने जाने वाले हरेली को पारंपरिक तरीके से मनाते हुए सीएम हाउस में गोबर खरीदने का शुभारंभ किया है। गौधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदने की घोषणा के बाद छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वरिष्ठ स्वयंसेवकों ने इसका स्वागत किया था, और सीएम हाउस जाकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को इस निर्णय के लिए बधाई दी थी।
हरेली के अवसर पर जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस योजना की विधिवत शुरुआत कर रहे थे, तब भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ इकाई द्वारा इसके खिलाफ सोशल मीडिया पर #गुड़गोबर के नाम से एक अभियान चलाया जा रहा था, अब बीजेपी अपने इस अभियान से घिरती नज़र आ रही है, क्योंकि इससे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक नाराज बताए जा रहे हैं, उनका मानना है कि गाय, गोबर, गौमूत्र और गौरक्षा की बात करने वाले कब से इसका विरोध करने लगे हैं।

सितंबर 2018 में मथुरा स्थित आरएसएस समर्थित संस्था दीनदयाल धाम के द्वारा गौमूत्र और गोबर से बनी सामग्री को ऑनलाइन विक्रय करने के प्रयास में थी, बकायदा ऑनलाइन कम्पनियों से इसके लिए सम्पर्क भी किया था, और उस समय आरएसएस के प्रवक्ता अरुण कुमार ने कहा था कि इस तरह के उत्पादों को बेचने का असल उद्देश्‍य स्थानीय लोगों को रोजगार देना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

वहीं फरवरी 2019 में ही केंद्र सरकार ने गोमूत्र सहित गाय से जुडे़ पदार्थों और उनके लाभ पर वैज्ञानिक रूप से विधिमान्य अनुसंधान करने के लिए 19 सदस्यीय समिति बनाई थी, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्वहिंदू परिषद (विहिप) के तीन सदस्यों को शामिल किया गया था। जिसे राष्ट्रीय संचालन समिति नाम दिया गया था, जिसमें अक्षय उर्जा मंत्रालय, बायोटेक्नोलाजी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विभागों के सचिव और दिल्ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के वैज्ञानिक शामिल थे, जिसमें आरएसएस और विहिप से जुडे संगठनों विज्ञान भारती और गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र के तीन सदस्य भी शामिल थे। समिति गठित करने मुख्य उद्देश्य यही था कि पंचगव्य यानी गाय का गोबर, मूत्र, दूध, दही और घी के लाभों को वैज्ञानिक रूप से विधिमान्य बताने में मदद कर सके।

वहीं संघ-बीजेपी के सिम्पेथाइज़रो का स्पष्ट मानना है कि गाय, गोबर, गौमूत्र से जुड़ी योजना की आलोचना करने के लिए बीजेपी को ऐसे किसी भी अभियान से बचना चाहिए, ताकि विचारधारा के अनुरूप उसकी छवि स्वच्छ बनी रहे, क्योंकि बीजेपी हमेशा से ही गाय, गोबर, गौमूत्र और गौरक्षा की पक्षधर रही है, और जिस तरह गौरक्षा के नाम पर मॉब लिंचिंग का झूठा आरोप लगाकर तथा मोदी सरकार के राष्ट्रवादी अभियान की आलोचना कर कांग्रेस का जो हश्र देशभर में हुआ है, वही हालत छत्तीसगढ़ में बीजेपी की होते देर नही लगेगी।

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