रायपुर/ सामाजिक कार्यकर्ता शेषनारायण शर्मा ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण लगे लम्बे लॉक डाउन के बीच 5 मई को छत्तीसगढ़ में शराब की दुकानें खुल गई थी, नए वित्त वर्ष में सरकार ने शराब की कीमतों में बढ़ोतरी की थी, जिसके कुछ दिन बाद छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कोरोना टैक्स लगाकर शराब के दामों में फिर से वृद्धि की गई, अब 21 मई से बढ़े हुए दाम पर शराब बेची जाने लगी है।
उन्होंने बताया सरकार द्वारा शराब की मूल्यवृद्धि करने के बाद शराब दुकान में प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मचारियों द्वारा अब ओवररेट शराब बेची जा रही है, चीफ रेंज में 180 एमएल की छोटी बोतल में लगभग 10 रुपए अधिक वसूल किया जा रहा है, जबकि 750 एमएम की बोतल में 150 से 200 रुपए अधिक लिया जा रहा है। शर्मा ने कहा कि राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के लगभग सभी शहरों व ग्रामीण इलाकों का यही हाल है, जहां शराब दुकानों में ओवररेट शराब बेची जा रही है।
मदिरा सेवन करने वाले लोग दुकान के कर्मचारियों से शराब खरीदने के बाद बिल मांगने पर कर्मचारियों द्वारा ग्राहकों के साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है, जबकि कोरोना संकटकाल में मध्यम वर्ग और गरीब लोगों के आय का कोई साधन नही रह गया है, उसके बावजूद सरकार द्वारा शराब दुकानों को खोला गया है और साथ में अतिरिक्त कोरोना टैक्स लगा दिया गया है, कोरोना टैक्स के साथ ही मदिरापान करने वाले गरीब मध्यम वर्ग के लोगों से शराब दुकान के कर्मचारी अधिक कीमत वसूल रहे हैं, जिस पर अबतक कोई कार्रवाई नही की गई है।
शेषनारायण शर्मा ने बताया कि लॉक डाउन के दौरान जब शराब दुकानें बंद थी, तब अवैध शराब बिक्री शिकायत आ रही थी, जिसे समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था, तथा बंद के दौरान रायपुर के तेलीबांधा, राजेंद्र नगर, और कटोरा तालाब सरकारी शराब दुकानों में चोरी भी हुई थी, जिसके बाद दुकान के सुपरवाइजर व कर्मचारी भी जांच के दायरे में आए थे, और उनसे पूछताछ की गई थी, किंतु अबतक कोई ठोस कार्रवाई नही की गई है, उन्होंने कहा कि शीघ्र ही इससे सम्बंधित जानकारी प्राप्त कर शासन से कार्रवाई की मांग की जाएगी।

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