रायपुर/ लॉकडाउन पार्ट-थ्री में खुलीं शराब दुकानों पर लोगों ने ओवररेट में दारू खरीद कर जाम छलकाए। बता दें कि शनिवार से रविवार तक दो दिन पूर्ण लॉकडाउन तक शराब दुकानें बंद रहेंगी। ऐसे में सुबह आठ बजे शराब दुकानों पर भीड़ उमड़ी, लेकिन दोपहर होने तक इनकी संख्या सिर्फ दर्जन भर ही दिखी। लेकिन इस शहर की 36 शराब दुकानों में प्रचलित ब्रांड लॉकडाउन के बाद गायब रही। प्रचलित ब्रांड के बजाय सिर्फ छत्तीसगढ़ में बनी अंग्रेजी शराब की आपूर्ति दुकानों में हुई। सूत्रों के मुताबिक आबकारी के गोदामों में प्रचलित ब्रांड की शराब पर्याप्त मात्रा में है। इसके बावजूद आबकारी विभाग और यहां शराब बनाने वाली कंपनियों की मिली भगत के चलते अंग्रेजी शराब की अनाम ब्रांड ही दुकानों तक पहुंचीं। इसके पीछे कारण है कि लोकल ब्रांड की शराब बेचने पर अधिक कमीशन मिलता है। इधर शराब दुकानों को संचालित करने वाली प्लेसमेंट कंपनी को ओवररेट में शराब बेचने की खुली छूट दे दी। इतना ही नहीं, आबकारी की 12 उड़नदस्ता टीम भी कहीं नजर नहीं आईं। लॉकडाउन में शारीरिक दूरी बनाकर शराब खरीदने वाले लोग जब ओवररेट का विरोध करते तो शराब बिकवाने में ड्यूटी पर मौजूद पुलिस उन्हें डांट-डपट और डंडा फटकार कर भगा देती। ऐसे में इनकी भूमिका शहर की अधिकांश दुकानों पर संदिग्ध नजर आई।

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ रायपुर में पांच दिनों में 50 करोड़ रुपये की देसी और अंग्रेजी शराब बिकी। अगर ओवररेट का हिसाब लगाएं तो कम से कम 10 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई प्लेसमेंट कंपनी ने की। आरोप है कि ओवररेट बिक्री नहीं करने के पीछे आबकारी विभाग की भी हिस्सेदारी है। प्रचलित ब्रांड के आगे और पीछे के नाम को यहां की कंपनियों ने हाइजैक कर लिया है। इससे लोग झांसे में भी आ रहे हैं। दुकानों से प्रचलित ब्रांड के नहीं मिलने और अनाम ब्रांड की खरीदी में ओवररेट की खुली मनमानी का नजारा शहर की अधिकांश दुकानों पर दिखा है।

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