अरविंद तिवारी

कापा, हवाई ( यूएसए)/ हिन्दुज्म टुडे मैग्जीन ” यूएसए ” ने पूर्वाम्नाय गोवर्धन मठ के 145 वें शंकराचार्य अनन्त श्रीविभूषित पुरीपीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती को सनातन धर्म के संरक्षण और अपने आध्यात्मिक ज्ञान से समकालीन मुद्दों पर अपनी बात को निर्भीक होकर प्रस्तुत करने हेतु 2019 हिन्दू रेनेसा बोर्ड के अन्तर्गत ‘हिंदू ऑफ द ईयर’ के पुरस्कार से सम्मानित किया है।
गौरतलब है कि पुरी शंकराचार्य ने स्वामी करपात्री जी महाराज से विधिवत दीक्षा ग्रहण की। उन्होंने ही इनको निश्चलानंद सरस्वती का नाम प्रदान किया। महाराज श्री 75 वर्ष के उम्र में आज भी आध्यात्मिक , धार्मिक , गौसेवा के प्रचार प्रसार के लिये निरंतर भ्रमण करते रहते हैं। आध्यात्मिक शिक्षा के अलावा गुरुजी समकालीन विषयो पर जैसे युवा, महिलाओं, पर्यावरण के संबंध में अपने विचार प्रकट करते रहे हैं। ये मुक्ति मंडप ” जगन्नाथ मंदिर उड़ीसा ” के स्थायी सदस्य भी हैं और अपनी सलाह देते रहते हैं। इनकी सलाह से ही पुरी मंदिर के देवी देवताओं के रख रखाव का काम किया जाता है। इनके द्वारा स्थापित संगठन धर्म संघ पीठ परिषद , आदित्य वाहिनी – आनंदवाहिनी शिक्षा ,स्वास्थ्य , गौ संरक्षण, और सामाजिक संस्कृतिक क्षेत्रों में कार्यरत है। महाराज श्री ने वर्ष 2007 में ऋषिकेश में ‘गंगा आरती’ और पुरी में ‘महोदधी’ आरती की शुरुआत की। सेवा के नाम पर हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करने वाली मदर टेरेसा की भी आलोचना की है। उन्होंने भारतीय सरकार को रामसेतु को खोलने की योजना का भी विरोध किया । अभी कुछ सालों से जगन्नाथपुरी की प्रबंधन संबंधी गतिविधियों में अपनी राय दे रहे हैं और सरकार भी उनसे सलाह से ले रही है । महाराज श्री को इस बात पर गहरा क्षोभ है कि राज्य सरकार प्राचीन मंदिरों का प्रबंधन अपने हाथ में ले लेती है और सनातनी परंपरा की अवहेलना करती है। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय से ही मंदिर हमारे सांस्कृतिक, धार्मिक ,शैक्षणिक और सामाजिक केंद्र रहे हैं लेकिन राज्य मंदिरों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने के बाद सनातन धर्म और भारतीय समाज को नुकसान पहुंचाते हैं। राज्य सरकार भ्रष्टाचार के नाम पर प्रबंधन को अपने हाथ में लेते हैं और मंदिर के फंड से मदरसों को चलाते हैं। दूसरी और पुजारी और कर्मचारियों की तनख्वाह भी बहुत कम है यह लोग मंदिर कार्य में दक्ष है और कोई नौकरी भी नहीं मिलती है इसलिये इसी पर निर्भर रहते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था में कमी है उन्होंने इसके लिये ब्रिटिश सरकार और उसके बाद स्वतंत्र भारत की सरकार को दोषी ठहराया है। आज भी बहुत से हिंदू अपनी विचारधारा और ज्ञान से सनातनी नहीं हो पा रहे हैं। बहुत कम लोग अपने दृढ चरित्र और अपने पिछले जन्मों के कर्मों के फल स्वरुप ही सनातनी हैं. बाकी सभी लोग मन और विचारों से प्रदूषित हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म ही आज के समय में मार्गदर्शन कर सकता है किंतु बहुत कम लोग हैं जो कि वैदिक संस्कार को जानते हैं और मार्गदर्शन करने में दक्ष है। आज के युग में सनातन धर्म ही विज्ञान और दर्शनशास्त्र में सामंजस्य स्थापित कर सकता है।

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