अरविंद तिवारी

जगन्नाथपुरी/ कर्नाटक पेजावर मठ के तैंतीसवें प्रमुख श्रीविश्वेश तीर्थ जी के देहावसान की सूचना पाकर दु:ख व्यक्त करते हुये पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्धनमठ पुरीपीठाधीश्वर अनन्त श्रीविभूषित श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि मेरे वे चिर परिचित थे और देवयोग से उडूपी के यात्रा के प्रसंग में भगवान के मंदिर प्रांगण में उनके दर्शन, संभाषण का सुयोग भी सधा। वे द्वार तक मुझे लेने आये और अद्भुत अपनत्व, स्नेह, सम्मान का परिचय दिया वे स्वभाव से सौम्य थे विद्वान, परंपरा प्राप्त संत थे। माध्व संप्रदाय के प्रति उनकी आस्था थी और इस पवित्र संप्रदाय के माननीय विशेषज्ञों में उनकी ख्याति थी। सनातन, वैदिक, आर्य हिंदुओं के अस्तित्व की रक्षा में वे तत्पर थे। साथ ही साथ सद्भाव पूर्वक संवाद के माध्यम से सामंजस्य साधने की क्षमता भी उनमें अद्भुत थी। विगत कई दिनों से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था ऐसी दशा में उन्होंने देहत्याग किया , ऐसी मुझे जानकारी मिली। भगवान के लाड़ले ,प्यारे जो होते हैं देहत्याग के पश्चात पुरीअष्टक से उनकी जीवकला का उत्क्रमण श्रीभगवद्धाम में होता है। फिर भी उनके अनुयायी, भक्तवृंद, उत्तराधिकारी महानुभाव उनके देहावसान से अवश्य ही दुखी होंगे। मुझे भी सूचना पाकर कष्ट ही हुआ है, भगवान से प्रार्थना है कि उन्हीं की कृपा से ऐसे संत भारत को सुलभ होते रहे।

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